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CG-मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर सियासी संग्राम: ओपी चौधरी बोले- जय-वीरू के झगड़े में रुका निर्माण, तो सिंहदेव का आया दिलचस्प जवाब, कहा….


अंबिकापुर, 8 जून 2026। मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन के निर्माण में लगातार हो रही देरी को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सोमवार को अंबिकापुर दौरे पर पहुंचे प्रदेश के वित्त मंत्री एवं सरगुजा जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने अधूरे अस्पताल भवन के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, तो वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भाजपा सरकार पर अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कांग्रेस पर आरोप मढ़ने का आरोप लगाया।

“जय-वीरू के झगड़े में नहीं बन पाया अस्पताल” : ओपी चौधरी

अंबिकापुर में मीडिया से चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच मतभेदों का खामियाजा मेडिकल कॉलेज अस्पताल परियोजना को भुगतना पड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जय-वीरू के झगड़े” में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल नहीं बन पाया।

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चौधरी ने दावा किया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है और निर्माण एजेंसी को जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से परियोजना वर्षों तक प्रभावित रही।

सिंहदेव का जवाब: ढाई साल बाद भी बहानेबाजी

ओपी चौधरी के बयान पर पलटवार करते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा कि भाजपा सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को सत्ता में आए ढाई वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस दौरान न तो निविदा प्रक्रिया समय पर पूरी हुई और न ही निर्माण कार्य को अपेक्षित गति मिल सकी।

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सिंहदेव ने कहा, “ओपी चौधरी स्वयं वित्त मंत्री और सरगुजा के प्रभारी मंत्री हैं। यदि सरकार गंभीर होती तो अब तक अस्पताल निर्माण काफी आगे बढ़ चुका होता। अपनी नाकामी छिपाने के लिए कांग्रेस और मुझे दोषी ठहराना उचित नहीं है।”

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण पूरा कराया गया था, अस्पताल भवन का कार्य शुरू हुआ था तथा सुपर स्पेशियलिटी और पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी की गई थी।

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10 साल बाद भी अधूरी परियोजना

वर्ष 2016 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब तक लगभग 366 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद इसके अस्पताल भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। अतिरिक्त राशि की स्वीकृति और निर्माण कार्य में देरी के कारण परियोजना लगातार प्रभावित होती रही।

अस्पताल भवन अधूरा होने का असर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों पर भी पड़ रहा है। वर्तमान में जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के संबद्ध अस्पताल के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि एनएमसी मानकों के अनुरूप अलग अस्पताल भवन आवश्यक है।

जनता को इंतजार, नेता कर रहे आरोप-प्रत्यारोप

सरगुजा संभाग के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान के रूप में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज अस्पताल अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा जहां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को निर्माण में देरी का दोषी बता रही है, वहीं कांग्रेस वर्तमान सरकार की कार्यशैली और निर्णय क्षमता पर सवाल उठा रही है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरगुजा की जनता को अब भी उस अस्पताल भवन के पूरा होने का इंतजार है, जिससे क्षेत्र को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

cgnews24 Team

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